उत्तम सत्य- डॉ एच सी विपिन कुमार जैन
शिवानी जैन एडवोकेट की रिपोर्ट
उत्तम सत्य- डॉ एच सी विपिन कुमार जैन 
उत्तम सत्य धर्म : जो सत्य वचन है वह ही धर्म है। यह सत्य वचन दया धर्म का मूल कारण है, अनेक दोषों का निवारण करनेवाला है, इस भव में तथा परभव में सुख का करनेवाला है, सभी के विश्वास करने
का कारण है। सत्यवादी में सभी गुण रहते हैं सत्यवादी सदाकाल कपटादि दोष रहित होकर जगत में भी मान्यता को प्राप्त होता है, तथा परलोक में अनेक देव, मनुष्यादि उसकी आज्ञा अपने मस्तक के ऊपर
धारण करते हैं।असत्यवादी यहाँ भी अपवाद , निंदा करने योग्य होता है ,सभी की अप्रतीति का कारण है, बंधु- मित्रादि भी अवज्ञा करके छोड़ जाते हैं, राजा द्वारा जिह्वाछेद – सर्वस्व हरणादि दण्ड पाता है।
परलोक में तिर्यंचगति में वचन रहित एकेन्द्रिय विकलत्रयादि में असंख्यात भव धारण करता है। अतः सत्यधर्म का धारण करना ही श्रेष्ठ है।
असत्य भाषण करने का दूसरा कारण भय है। मनुष्य को सत्य बोलने से जब अपने ऊपर कोई आपत्ति आती हुई दिखाई देती है। अथवा अपनी कोई हानि होती दिखती है। उस समय वह डरकर झूठ बोल देता है, झूठ बोलकर वह उस विपत्ति या हानि से बचने का प्रयत्न करता है।
असत्य बोलने को तीसरा कारण मनोरंजन भी है। बहुत से मनुष्य हंसी मजाक में कोतूहल के लिये भी झूठ बोल देते हैं। दूसरे व्यक्ति को भ्रम में डालकर या हैरान करके अथवा किसी को भय उत्पन्न कराने के लिये या दूसरे को व्याकुलता पैदा करने के लिये झूठ बोल देते हैं। इसी से उनका मनोरंजन होता है।
डॉ एच सी विपिन कुमार जैन



